दिन में तीन रंग बदलता यह ऐतिहासिक शिवलिंग, अपरमपार है इनकी महिमा

 

हरदोई जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर मौजूद ग्राम सकाहा में एक प्राचीन शिवलिंग मौजूद है. इस मंदिर से जुड़ी हुई तमाम सी चौंकाने वाली कहानियां और तथ्य जुड़े हुए हैं. इस प्राचीन मन्दिर में चमत्कारी शिवलिंग की महत्ता को जानकर लोग दूर-दूर से यहां आते हैं। दिन में तीन रंग बदलता यह ऐतिहासिक शिवलिंग, अपरमपार है इनकी महिमा और भगवान शिव जी की आराधना करते हैं। कहा जाता है कि यहां आने वाले लोगों के ऊपर कोई भी संकट क्यों न हो, उसे भगवान शिव अवश्य ही हर लेते हैं.। साथ ही यहां मौजूद भगवान शिव के चमत्कारी एवम सिद्ध शिवलिंग के सामने सच्चे मन से अपनी मुराद मांगने वाले सभी भक्तों की मनोकामनाएं भी पूरी हो जाती हैं।साथ ही दिन में तीन रंग बदलता यह ऐतिहासिक शिवलिंग,


काफी साल पहले जब एक पुलिस के इंस्पेक्टर ने खुदाई करवाई थी तो भगवान शिव आये थे स्वप्न में,

 

कहा जाता है कि आज से करीब 70 वर्ष पूर्व बेहटागोकुल थाने में मौजूद एक पुलिस के दारोगा ने सकाहे के इस चमत्कारी शिवलिंग को बेहटागोकुल थाना क्षेत्र में स्थापित करवाने के लिए यहां की खुदाई करवाई थी।2 दिन तक लगातार खुदाई करने के बाद भी शिवलिंग का कोई छोर और अंत नहीं मिला और नीचे से पानी आना शुरू हो गया. तब दारोगा ने खुदाई रुकवाकर पानी जाने के बाद खुदाई शुरू कराने का निर्णय लिया.भगवान शिव ने दारोगा को सपने में दर्शन देकर उनके शिवलिंग को यथावत रहने दिए जाने का आदेश दिया था। उसके बाद उस दारोगा ने यहां बने छोटे से साधारण मंदिर को एक भव्य मन्दिर में प्रवर्तित करवा दिया था। एक अन्य कहानी सेठ लाला लाहोरीमल की भी यहां से ही ताल्लुख रखती है।कहा जाता है कि सेठ के बेटे को फांसी की सजा हो गई थी. तब घूमते टहलते इस शिवलिंग के महत्व और महिमा से अनजान सेठ लाहोरीमल ने दुखी मन से अपने बेटे की फांसी की सजा माफ किए जाने की मन्नत मांगी. तभी अगले दिन उसके बेटे को दी जाने वाली फांसी की सजा माफ हो गई और फिर तभी से सेठ ने इस मंदिर में विकास कार्य कराना शुरू किया था. इसी तरह के तमाम तथ्य इस शिवलिंग से जुड़े हुए हैं, जो इसके महत्त्व को दर्शाते हैं।

सभी भक्तों की मनो-कामनाओं को पूरा करते हैं संकटहरण भगवान शिव।

संकटहरण सकाहे के शिव मंदिर में मौजूद इस विशाल शिवलिंग के इतिहास से आज भी लोग अनजान हैं. यहां तमाम खोजकर्ता आए और गए, लेकिन कोई भी इस शिवलिंग के इतिहास की जानकारी नहीं जुटा पाया. यहां के लोगों का कहना है कि उनके दादा और परदादा के समय में भी ये शिवलिंग यहां यथावत मौजूद था. ये शिवलिंग एक स्वयं भू शिवलिंग है, जिसका प्राकट्य स्वयं ही हुआ था. लोगों का मानना है कि इसमें स्वयं भगवान शिव का वास है।

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