अपराधी की कोरोना जांच को लेकर-दारोगा व चिकित्सको में हुई झड़प ।

शामली जनपद के जिला अस्पताल में स्वास्थ विभाग की लापरवाही देखने को मिली है..अपराधी का कोरोना टेस्ट कराने को लेकर डॉक्टर्स व दारोगा में तीखी बहस हुई है..आरोप है कि चिकित्सक कोरोना टेस्ट के नाम पर टाल मटोल कर रहे थे.और अपने कार्य से बचने के लिए दारोगा को इधर से उधर चक्कर कटा रहे थे.दारोगा ने जब सख्ती से डॉक्टरो से पूछा तो सभी चिकित्सक एक हो गए और दरोगा से बहस शुरू कर दी.आरोप यह है कि अपराधी का टेस्ट कराने आए दारोगा को घंटो तक बैठना पड़ा साथ ही अपराधी की कोरोना जांच को लेकर-दारोगा व चिकित्सको में हुई झड़प ।जिसके बाद भी स्वास्थ्य कर्मियों ने उसका टेस्ट नही किया.स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी जिम्मेदारी को एक दूसरे पर डालते हुए दारोगा को घंटों तक घुमाए रखा.दरोगा व स्वास्थ्य कर्मियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला घंटों तक चलता रहा है.जिसके बाद दोनो पक्ष शांत हुए और अपराधी का कोरोना टेस्ट लिया गया.दारोगा का कहना है कि शासन के दिशा निर्देशों के अनुपालन में जेल भेजे जाने वाले अपराधी का कोरोना जांच कराई जानी अनिवार्य है.जिसके तहत दारोगा अपराधी को लेकर हॉस्पिटल पहुँचा था.दरअसल दारोगा का नाम विकास कुमार है.जो थानाभवन थाने के उप-निरीक्षक है.दारोगा विकास इस्लामपुर भैसानी निवासी बाबू को कोरोना टेस्ट कराए जाने के लिए शामली सीएससी में लेकर आए थे.जहां पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी ड्यूटी समाप्त होने का हवाला देते हुए टेस्ट करने से इंकार कर दिया.जब आने वाली महिला चिकित्सक से कोरोना की जांच किए जाने का अनुरोध किया तो महिला चिकित्सक ने वहां पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों से ही टेस्ट कराए जाने की बात कही और फोन काट दिया.दरोगा ने दोबारा मौके पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों से टेस्ट करने का अनुरोध किया तो दोनों पक्षों में तीखी झड़प शुरू हो गई.एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी मनमर्जी दिखाते हुए कोरोना टेस्ट करने से इनकार कर दिया.जिसके बाद कुछ और चिकित्सक मौके पर पहुँचे ओर दोनो पक्षों के लोगो को समझा बुझाकर शांत कराया.जिसके बाद अपराधी का कोरोना टेस्ट कराया गया ।

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