मंदिर मस्जिद बंद-गणेश मूर्ति वा ताज़िए बनाने वालो का भी कारोबार बंद

कानपुर-क्या जमाना आया है की मंदिर व मस्जिद जहां बंद हो गई मंदिर में जहां भगवान कैद हैं मस्जिद में नमाजियों की जहाॅ अवाजवाही पर पहरा है वही खुदा के बंद्दो पर भी उनके हुनर पर लगाम लगा दी गई है क्या वक्त आ गया है की जमीन की मिट्टी से हाथों की उंगलियों से तराश तराश कर सुंदर मूर्तियां बनाई जाती थी। मिट्टी से मूर्ति गढ़ने वाले आज भगवान की मूर्ति बनाने वाले जिनकी बनाई मूर्ति सभी जगह पूजी जाती हैं मूर्ति को लोग बड़ी श्रद्धा से ले जाते हैं।

पहले यह हालात थे कि काफी पहले से डिमांड मूर्तियां की आती थी इस समय डिमांड नहीं है।

तथा बहुत सम्मान व गाजे बाजे के साथ विसर्जित करते हैं आज मिट्टी की मूरत गढ़ कर खुदाई डालने वाले मूर्ति निर्माता बेरोजगार हो गए हैं इस बार गणेश उत्सव सार्वजनिक रूप से नहीं हो पाएगा। ना हीं कार्यक्रम होंगे और ना हीं जुलूस निकलेंगे जिससे मूर्तियों की मांग बहुत कम हो गई है पहले यह हालात थे कि काफी पहले से डिमांड मूर्तियां की आती थी इस समय डिमांड नहीं है।

कई तरह की पाबंदियों की वजह से तमाम लोगों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है।

मोहर्रम महा में एक मोहर्रम से 10 मोहर्रम तारीख तक सभी जगह ताजियों की जबरदस्त दरकार होती थी मगर इस मर्तबा हालात बिलकुल खिलाफ है ताजियों के सार्वजनिक जुलूस वा इमामबाड़ों में भीड़ वा पैगियो पर कई तरह की पाबंदियों की वजह से तमाम लोगों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है। तमाम कारीगर ताजिए बनाते थे तमाम पैगिओ के लिए कमर बांधने में काम आने वाले सामानों को बनाते थे तो कुछ लोग इमामबाड़ों में ताजियों के जुलूस वा कार्यक्रम में कुछ ना कुछ कार्य करते थे जिससे उनको चार पैसे बचते थे आज सभी लोग आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं।

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