भगवान के कारण पैथोलॉजी में हुआ टेस्ट महंगा ? गरीबो को लूटते भगवान।

भगवान

सूत्रों की माने तो डॉक्टरों के टेस्ट में 60% तक का होता है कमीशन.डॉक्टर मतलब पांचों उंगली घी में सर कढ़ाई में.

जहां एक तरफ डॉक्टरों को भगवान कहा जाता है तो वहीं दूसरी तरफ इन्हीं भगवान के चलते राजधानी लखनऊ समेत कहीं भी  किसी भी पैथोलॉजी में कोई भी टेस्ट कराना हो गया है महंगा। बताया जाता है कि किसी भी डॉक्टर की क्लीनिक पर जाकर अगर आप डॉक्टर को दिखता है और आप जब भगवान यानी कि डॉक्टर के जांच का पर्चा लेकर पैथोलॉजी में जाते हैं। तो भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर के इस पर्चे को देखकर पैथोलॉजी में जांच के नाम पर खेला जाता गन्दा खेल है।जहाँ डॉक्टर का बना रहता है जांच के नाम पर 50% से अधिक का कमीशन। जिसके चलते ₹200 वाली जांच के देने पड़ते हैं मरीजो को 500 रुपये। भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर्स के मजबूत कमिशन के चलते पैथोलॉजी में टेस्ट होंते हैं महंगे…

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वहीं अगर कुछ पैथोलॉजी के मालिकों की माने तो पैथोलॉजी के मालिकों का कहना था कि डॉक्टर खुश मतलब भगवान खुश.. भगवान के बगैर पैथोलॉजी मालिक का कहना था कि नहीं चला सकते हैं वह अपनी पैथोलॉजी।वही बात की जाए तो मरीजों की तो मरीज बेचारा इन भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर और पैथोलॉजी के बीच में फसकर रहे जाता है। क्योंकि उसके खून और पसीने की कमाई को सीरीज लगाकर चूस लिया जाता है।पैथोलॉजी के मालिकों की माने तो डॉक्टरो को साधने से ही चलती हैं पैथोलॉजी लैब..वहीं अगर सूत्रों की मानें तो भगवान का यह खेल शासन और प्रशासन से कोई छुपा हुआ नहीं है। और ना ही स्वास्थ्य विभाग से उसके बावजूद भी गरीबों का खून पीने वाले इन भगवानों पर नहीं होती है कोई कार्यवाही जिसके चलते गरीब आदमी जांच के नाम पर लूटने को है मजबूर। पैथोलॉजी और डॉक्टरों का यह खेल कोई नया खेल नहीं है जांचों के नाम पर गरीबों और मरीजों के साथ होता है गंदा कमीशन का खेल।

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डॉक्टर के कमीशन से लेकर पैथोलॉजी की जांच में खर्च होने वाले रुपए की जानकारी होने के बावजूद भी मरीज बेचारा कर भी कुछ नहीं पाता। अगर सूत्रों की माने तो पैथोलॉजी में डॉक्टरों का होता है अच्छा खासा कमीशन जिसके जरिए पैथोलॉजी और डॉक्टर दोनों की चलती है दुकान। करोना काल में भी इन पैथोलॉजी और भगवान यानी कि डॉक्टरों की लापरवाही देखने भी मिली थी। जहां पर कोविड-19 की जांच में भी गड़बड़ियां पाई गई थी। लेकिन सवाल आखरी यहां पर आकर ठहरता है की भगवान का रूप कहे जाने वाले डॉक्टर ही जब कमीशन के चक्कर में अपने मरीज की जेब को ही नहीं छोड़ेंगे तो आखिर मरीज की सेहत का क्या होगा। अमीरों की तो छोड़ दीजिए साहब गरीबों को भी नहीं छोड़ते हैं यह भगवान और पैथोलॉजी।

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