जिला अस्पताल में मोबाइल के टार्च की रोशनी में हो रहा मरीजो का इलाज- सरकार के दावों की खुली पोल

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यह लाइट की कोई व्यवस्था नहीं है। जिसके कारण उनके मरीज का इलाज मोबाइल के टार्च की रोशनी में किया जा रहा है।

जहां एक और लगातार सरकार और स्वास्थ विभाग प्रदेश के हॉस्पिटलों में हाईटेक सुविधाएं और अस्पतालों में हर तरीके के इंतजाम की बातें करते हुए नजर आते हैं। तो वही इन हॉस्पिटलों में से बुनियादी चीजें ही गायब हैं जिसके चलते मरीज को उठानी पड़ती है दिक्कतें। ऐसा ही एक मामला कौशांबी जिले के जिला अस्पताल में देखने को मिला जहां पर हॉस्पिटल परिसर में बिजली ना होने के चलते मोबाइल के टॉर्च की रोशनी में मरीज का इलाज किया जा रहा है।  बताया जा रहा है कि हॉस्पिटल का ट्रांसफार्मर जल जाने की वजह से हॉस्पिटल परिसर में अंधेरा था और जनरेटर भी नहीं चल रहा था। जिसकी वजह से मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में मरीज का डाक्टरो ने इलाज शुरू कर दिया।

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कौशांबी जिले में मंझनपुर में बने हुए जिला अस्पताल में बताया जा रहा है की दोपहर के समय अचानक कि ट्रांसफार्मर जल जाने के कारण खराब हो गया। पूरे हॉस्पिटल परिसर में अंधेरा छाया जाता है वही बताया गया है कि इस हॉस्पिटल परिसर में पावर बैकअप के लिए हैवी जनरेटर की भी व्यवस्था है। लेकिन ट्रांसफार्मर जल जाने के बाद हॉस्पिटल परिसर के कर्मचारियों द्वारा जनरेटर नहीं चलाया गया। जिसके चलते हॉस्पिटल में इलाज कराने आए राम सिंह का डॉक्टरों ने मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में इलाज शुरू कर दिया। मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में हो रहे इलाज को देखकर कहीं ना कहीं सरकारी और स्वास्थ विभाग की दावों की पोल खोलती हुई नजर आई।

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जिला अस्पताल में मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में इलाज करा रहे राम सिंह के परिवार का कहना था कि राम सिंह अपनी बहन के घर गांव आया था। अचानक ही उसकी साइकिल गिर गई जिसके कारण उसके पैर  में फ्रैक्चर हो गया। आनन-फानन में उसको जिला अस्पताल लाया गया लेकिन जब मरीज का परिवार मरीज को लेकर हॉस्पिटल पहुंचा तो यहां की व्यवस्था देख कर दंग रह गया। हॉस्पिटल परिसर में लाइट नहीं आ रही थी और मरीज दर्द से तड़प रहा था। जिसको देखते हुए डॉक्टरों ने मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में ही मरीज का पैर का प्लास्टर करना शुरू कर दिया। वही जब इस मामले में जिला अस्पताल के डॉक्टरों से पूछने की कोशिश की गई तो डॉक्टरों ने कैमरे के आगे कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। लेकिन कुछ लोगों ने बिना कैमरे के यह जरूर बताया कि हॉस्पिटल में जनरेटर है।लेकिन उसका डीजल को बचाने के लिए कर्मचारियों द्वारा चलाया नहीं जाता है। जिसकी वजह से  यहां आने वाले मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बरहाल जो भी हो मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में जिला हॉस्पिटल के अंदर डॉक्टरों का इस तरीके से इलाज करना कहीं ना कहीं सरकार और स्वास्थ्य विभाग के उन दावों की पोल खोलता हुआ नजर आ रहा है। जिसमें खुद सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि हर हॉस्पिटल में हाईटेक सुविधाएं दी जा रही।

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