एक ऐसा गांव जहां पर तैयार होती है फौजियों की नर्सरी-दी जाती है फौजी की ट्रेनिंग-गोरखपुर

आर्मी

गोरखपुर-फौज में भर्ती होना अधिकतर युवाओं का सपना होता है और लोग इसको लेकर तैयारियां भी करते हैं लेकिन अधूरी तैयारियों की वजह से तमाम लोगों के सपने टूट जाते हैं। लेकिन गोरखपुर में एक ऐसा गांव है जहां पर फौजियों की नर्सरी तैयार होती है। शहर से 20 किलो मीटर दूर  बसा यह भीटी खोरिया गांव आज इस पाठशाला की वजह से जाना जाता है। इस गाँव के बाग में सेना और पुलिस में जाने की तैयारी करने वाले युवाओं का कोई परमानेंट ट्रेनर नही है लेकिन यहां से ट्रेनिंग लेकर फौजी बने लोग और रिटायर्ड फौजियों द्वारा अपने आने वाले पीढ़ी को फ्री में आकर गांव पर ट्रेनिंग देते हैं। पिछले 12 सालों से यहां पर हर रोज सैनिक बनाने की पाठशाला लगाई जाती है। साल के 365 दिन इस गांव में सैकड़ों युवा एक फौजी की ट्रेनिंग लेते हैं और यहां से ट्रेनिंग लेने के बाद यह पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों में अपनी तैनाती पाते हैं। इस गांव का शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां से कोई युवा किसी न किसी माध्यम से देश की सेवा न कर रहा हो। हालांकि इस ट्रेनिंग कैंप को लेकर कोई भी सरकारी मदद अभी तक नहीं मिली है लेकिन गांव वाले किसी मदद के इंतजार में भी नहीं है।

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गोरखपुर से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर एक ऐसा गांव है जहां पर कई गांव के नवयुवक देश सेवा करने के लिए सुबह 3:30 बजे से ही ट्रैक पर आ जाते हैं  , और दोपहर में 1:00 से 1:30 के बीच दोबारा उस फील्ड पर आकर फौज और पुलिस में जाने की तैयारी शुरू कर देते है लेकिन इन नौजवानों हर कोई परमानेंट कोच नहीं है इनको सिखाने वाले इनके सीनियर जो इस समय डिफेंस या पुलिस में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे हैं वही है जब वह छुट्टी पर अपने गांव आते हैं तो गांव के इन नौजवानों को जो फौज और पुलिस में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहते हैं उनको ट्रेनिंग देते हैं और उनकी कमियों को दूर कर सही सलाह भी देते हैं इतना ही नहीं इनके सीनियर दो डिफेंस और पुलिस में भर्ती हो चुके हैं वह गांव के नौजवानों को जो डिफेंस और पुलिस में जाने की इच्छा रखते हैं और तैयारी करते हैं उनको फाइनेंशियल मदद भी करते हैं ।  इस मैदान मेंं नौजवान आज सेे ही पिछले 12 सालों से यहां तैयारी करतेे हैं और डिफेंस पुलिस सहित कई डिपार्टमेंट में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे हैं । उस मैदान के पास ही इस प्राचीन बंडा बाबा की मंदिर है और वहां नौजवान मन्नत भी मांगते हैं कि अगर वह सेना में या पुलिस में भर्ती हो गए तो वहां जेवनार ( दूध और चावल) चढ़ाएंगे और उनकी अगर मन्नते पूरी हो जाती है तो वो मंदिर पर जेवनार चाहते हैं और प्रसाद सारे नौजवानों को बांटते हैं यह सिलसिला काफी सालों से चला आ रहा है । वही गांव के ही तैयारी कर रहे छात्र आनंद पांडे ने बताया कि यहां पर सभी प्रकार की ट्रेनिंग दी जाती है फौज में जाने की यहां हम लोग के सीनियर भैया लोग जब छुट्टी पर आते हैं तो वह लोग बताते हैं कि वर्कआउट कैसे करना है कैसे रनिंग करना है यह सारी बातें वह हम लोगों को बताते हैं हम लोग नियंता है ग्राउंड पर 1:30 से 2:00 के बीच आ जाते हैं और सुबह में 3:30 बजे ग्राउंड पर हम लोग आ जाते हैं वहां पर सारी वर्कआउट होती है उसके बाद रनिंग होता है एक्सरसाइज होता है हम लोगों का ग्राउंड काफी पुराना हो चुका है 12 सालों से लोग यहां तैयारी करते हैं सैकड़ों के आसपास नौजवान सेना और पुलिस में भर्ती हो चुके हैं मैं यहां लगभग 4 साल से तैयारी कर रहा हूं हमारे साथ के लगभग 8 से 10 लोग डिफेंस और पुलिस में भर्ती हो चुके हैं आनंद पांडे ने बताया कि इसके पहले जो लोग फौज में या फिर पुलिस में भर्ती हो चुके हैं उसके पहले उनके घर की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी काफी नीचे से वह लोग उठे हैं लेकिन फौज में भर्ती होने के बाद अब उनके घर की हालत काफी सुधरी है हम लोग अपने गांव में ही तैयारी करते हैं अगर बाहर से कुछ और सपोर्ट मिल जाए तो यहां के युवा काफी आगे तक जा सकते हैं नेशनल तक जा सकते हैं यहां के युवा।

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Army tवही गांव के ही रहने वाले सत्यनारायण पांडे ने बताया कि 15 साल से यहां तैयारी चल रही है । इसके पहले भी यहां के तमाम जवान सरहदों पर सेवा कर चुके हैं हम लोगों ने देखा कि बिना तैयारी के दूसरे जगहों पर जाकर अगर इस तरीके से आगे बढ़ सकते हैं तब यहां की बच्चों मेंं अगर उत्साह दिया जाए एक दौड़ का आयोजन किया जाए उनमें एक नई ऊर्जा भरी जाए ताकि इस गांव के बच्चों को देखकर 10 ,20 किलोमीटर दूसरे गांव के भी बच्चे यहां तैयारी करने आते हैं इनमें एक उत्साह और जोश है उत्साह और जोश में जब बच्चे कदम से कदम मिलाकर चलते हैं अपनी ऊर्जा को भी खेलते हैं तो नए बच्चे जो हैं उससे उनके अंदर एक रचनात्मक कार्य आता है एक ऊर्जा मिलती है देश सेवा करने की और एक जज्बा पैदा हो जाती है उनके अंदर इस समय फौज में 100 से लेकर लगभग डेढ़ सौ लोग भर्ती हो चुके हैं यूपी में 50 के लगभग लोक सेवा दे रहे हैं , पहले की अपेक्षा अब जिन घर के बच्चे सेना और पुलिस में सेवा दे रहे हैं उनके घर की आर्थिक स्थिति कैसी है इस सवाल पर उन्होंने बताया कि एक तो आत्मबल उनके अंदर था आर्थिक कमजोरी थी लेकिन आत्मबल बहुत बड़ा था वह जानते थे आज नहीं कल मेरी ऊर्जा कामयाब होगी और जब मैं कामयाब होगा तो गांव विकास करेगा और अगर गांव विकास करेगा तो मेरे परिवार का भी विकास होगा उनके घरों पर आने जाने पर लगता है उनके घर के लोगों की चेहरे की मुस्कान देखकर की एक आध्यात्मिक खुशी मिलती है जैसे लगता है कि वह अग्रसर प्रगति मार्ग पर चल रहे हैं ।

गांव आर्मी

वही  समाजसेवी व ग्रामीण दीपक कुलभूषण पांडे ने बताया कि यहां पर लगभग 15 साल से 10 गांव के बच्चे तैयाारी करते हम लोगों से जो सहयोग हो पाता है वह करते हैं यहां पर ना कोई गुरु है और ना ही कोई शिष्य है यहां के जो नौजवान फिटनेस में सही हो जाते हैं वह कहीं ना कहीं भर्ती हो जाते हैं यहां एक बंदा वीर बाबा हैं यह लोग मन्नत मांग कर लोग अपना फिजिकल तैयारी करते हैं और उसके बाद यही लोग जब भर्ती हो जाते हैं तो अगले बच्चों को भी प्रोत्साहन मिलता है और वही बच्चा एक दूसरे बच्चे के लिए उदाहरण भी बनता है इनके सीनियर ही इनको सिखाते हैं यहां से जो बच्चे सेलेक्ट हो जाते हैं वहीं जब छुट्टी पर आते हैं तो इनको ट्रेनिंग देते हैं और जब वह लोग नहीं रहते हैं इन्हीं के बीच का जो सीनियर बच्चा होता है वही सिखाता है।गोरखपुर का यह गांव सभी गांव के लिए एक उदाहरण है जहां के नौजवान देश की सेवा करने के लिए कम उम्र से ही जुड़ जाते हैं और इस गांव में लगभग घरों की नौजवान सेना और पुलिस में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे हैं और बच्चों के लिए या फिर बोली नौजवानों के लिए एक उदाहरण बन रहे हैं।

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