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शहीद दादा के लिये सेना में तैनात पौत्र ने लगाई न्याय की गुहार-जातिगत राजनीति का शिकार

आजकल प्रदेश में जाति की राजनीति चरम पर है पर क्या कोई कल्पना भी कर सकता है कि इस जातिगत राजनीति का शिकार कोई शहीद भी हो सकता है। हम बात कर रहे हैं गाजीपुर के तियरी गांव के सेना में शहीद रामध्यान सिंह की। रामध्यान सिंह भारत-पाक की 1971 को हुई जंग में शहीद हो गए थे बताया जाता है कि उस समय उनकी उम्र महज 27 साल की थी। शहीद की मौत के इतने सालों बाद उत्तर-प्रदेश सरकार द्वारा शहीद के सम्मान में गांव का तोरण बनवाने का निर्णय किया गया और विगत फरवरी-मार्च में इसके लिये बजट भी जारी कर दिया गया और शहीद रामध्यान के पौत्र जो की सेना में तैनात हैं उनके द्वारा इस तोरण द्वार का शिलान्यास भी करा दिया गया। शिलान्यास के बाद तोरण द्वार का निर्माण भी जिला पंचायत द्वारा करा दिया गया। पर इस तोरण द्वार पर शहीद रामध्यान सिंह की जगह उसी गांव के दिलराम बिंद का नाम अंकित कर दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार दिलराम बिंद पैरामिलिट्री में तैनात थे और बीमारी से उनकी मौत हुई थी और पैरामिलिट्री के जवानों को शहीद का दर्जा नहीं मिलता है। दरअसल तियरी गांव में बिंद जाति के लोग ज्यादा हैं और ग्रामीणों का आरोप है आगामी पंचायत चुनावों को देखते हुए शहीद के साथ भी जिम्मेदार नेताओं ने राजनीति कर दी। इस कृत्य से आहत होकर शहीद रामध्यान सिंह के पौत्र धर्मेंद्र जो की सेना में तैनात हैं उन्होंने एक वीडियो जारी कर न्याय की गुहार लगायी है। जातिगत राजनीति का शिकार हुआ शहीद के सेना मे तैनात पौत्र ने लगाई न्याय की गुहार।

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Shahid

जातिगत राजनीति का शिकार हुआ शहीद को देखते हुए सेना मे तैनात उनके पौत्र ने लगाई है न्याय की गुहार तो वही बताया जा रहा है कि गाजीपुर के जमानिया तहसील के तियरी गांव जो तहसील मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है इसी गांव के रहने वाले राम ध्यान सिंह जिन्होंने भारत पाक युद्ध 1971 में पूर्वी पाकिस्तान के हल्दी शहर में अपनी शहादत देकर देश का नाम ऊंचा किया था उस वक्त उनकी उम्र महज 27 साल थी और उनका एकमात्र पुत्र सुदामा जिसकी उम्र 8 वर्ष थी उसी शहीद के नाम को सम्मान देते हुए उत्तर प्रदेश शासन के द्वारा फरवरी मार्च के माह में ढाई लाख रुपए की लागत से तोरण द्वार निर्माण का फैसला लिया और और बजट जिला पंचायत को भेजा जिला पंचायत ने भी इसमें तत्परता दिखाते हुए ग्राम प्रधान के माध्यम से शहीद परिवार के घर यह खबर भिजवाया जिसकी जानकारी पर शहीद परिवार ही नहीं पूरे गांव के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई शहीद का पोता धर्मेंद्र जो सेना में कार्यरत है और छुट्टी के दौरान घर पर आया हुआ था उसने अपने दादा के सभी डॉक्यूमेंट ग्राम प्रधान को उपलब्ध कराया और तोरण द्वार के निर्माण के लिए शिलान्यास कार्यक्रम भी किया। शिलान्यास के बाद काम लगातार चलता रहा उसी दौरान धर्मेंद्र की ड्यूटी जो भारत चीन सीमा पर थी अपने ड्यूटी के लिए चला गया इसी दरमियान तोरण द्वार का निर्माण कार्य पूरा हो गया और अचानक से एक दिन शाम में उस गेट पर नाम लिखकर उद्घाटन कार्यक्रम भी कर दिया गया लेकिन जब अगले दिन सुबह ग्रामीण उस द्वार पर नाम देखे तो अवाक रह गए क्योंकि उस गेट पर जहां राम ध्यान सिंह का नाम होना चाहिए था उसकी जगह पर दिल राम बिंद का नाम अंकित था जिसके बाद से ही ग्रामीणों में काफी रोष देखने को मिल रहा है जिसको लेकर सहित के पुत्र सुदामा कुशवाहा जिला अधिकारी सहित तमाम जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी शिकायत भी किया लेकिन जनपद के जिम्मेदार अधिकारी कानों में तेल डालकर शहीदों के सम्मान में कोई रुचि नहीं दिखलाया और आज ही मामला जस का तस है।

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गांव के वीर सपूत राम ध्यान सिंह के शहादत के बाद उनके मिले सम्मान को लेकर ग्रामीण काफी खुश थे लेकिन जातिगत राजनीति के चलते सेना में शहीद के नाम के साथ जो खिलवाड़ किया गया है उसे ग्रामीण अब काफी आहत दिख रहे हैं।हमने जब कुछ ग्रामीणों से बात किया तो उन्होंने बताया कि दिल राम बिंद पैरामिलिट्री फोर्स के कर्मी थे जिन्हें शहीद का दर्जा भी नहीं मिलता है।ऐसे लोगों के नाम ग्राम प्रधान और जिला पंचायत के द्वारा सिर्फ आने वाले चुनाव में वोटों की राजनीति के लिए किया गया है। वही जब इस संबंध में ग्राम प्रधान को लगातार फोन कर इस बारे में जानकारी लेनी चाही लेकिन ग्राम प्रधान का मोबाइल नहीं उठा तब हमने जिला अधिकारी मंगला प्रसाद सिंह से बात किया तो उन्होंने बताया कि इस मामले की जांच करा लेते हैं और मौके पर एसडीएम जमानिया को भेजकर जानकारी करा लेते हैं विधि सम्मत जो भी होगा कार्रवाई कराई जाएगी। वही शहीद हुए दादा के लिये सेना में तैनात पौत्र ने जहा लगाई है न्याय की गुहार तो वही जातिगत राजनीति का शिकार हुआ परिवार भी अचंभित है।

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