दिव्यांग ने हत्या आरोप में 14 माह काटी जेल-एटीएम कार्ड ने खोली हकीकत, जिंदा निकली वो

Hatya
  •  लड़की की हत्या के मामले में 14 माह की जेल काट चुके दिव्यांग युवक को जेल भेजने को लेकर

  • जेल काटी तो वहीं दूसरी तरफ एटीएम कार्ड से युवक की बेगुनाही का पता चला और आखिरकार

खबर उन्नाव से जिस युवती की हत्या में दिव्यांग ने 14 माह जेल काटी, वह जिंदा मिली, बताया जा रहा है कि 14 माह पहले एक लड़की का शव मिलने पर जहां हड़कंप मच गया था। तो वहीं दूसरी तरफ पुलिस ने जब उसकी शिनाख्त कराई तो एक व्यक्ति ने उसको अपनी पत्नी के रूप में उसकी शिनाख्त की थी। साथ ही मृतक लड़की को अपनी पत्नी बताने वाले शख्स ने अपने ही पड़ोसी दिव्यांग युवक के ऊपर अपनी पत्नी की हत्या करने का आरोप लगाया था। जिसके बाद पुलिस ने हत्या के आरोप में दिव्यांग युवक को जेल भेज दिया था। लेकिन 14 माह के बाद लड़की घर जब एक एटीएम कार्ड पहुंचता है तो उस वक्त इस बात का रहस्य पता चलता है कि जिस लड़की के लिए दिव्यांग ने 14 माह की जेल काटी वाह जिंदा है। बताया जा रहा है कि हत्या के आरोप में कोर्ट ने दिव्यांग युवक को जहां जेल भेज दिया था तो वहीं जमानत पर दिव्यांग युवक इस वक्त जेल से बाहर था।वही मृतक लड़की के घरवालों ने पुलिस को बताया कि मृतक लड़की के नाम से उनके घर के पते पर एक एटीएम कार्ड आया है। जिसके बाद फौरन पुलिस हरकत में आई और पूरे मामले की छानबीन में जुट गई। लड़की की हत्या के मामले में 14 माह की जेल काट चुके दिव्यांग युवक को जेल भेजने को लेकर पुलिस भी कहीं ना कहीं इस मामले में फंसी हुई नजर आई। हत्या के मामले की सच्चाई पर से एटीएम कार्ड ने पर्दा हटा दिया है।

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वही आपको बात दे की यह पूरा मामला उन्नाव के जुराखनखेड़ा का है जहाँ पर निवासी योगेंद्र कुमार अवस्थी की 19 साल की पत्नी 21 मार्च 2018 को घर से कही लापता हो गई थी। जिसकी सूचना उन्होंने पुलिस को भी दे दी थी। जिसके बाद कुछ दिन बीत जाने के बाद 2 अप्रैल 2018 को आसीवन थाना क्षेत्र के शेरपुरकला गांव के बाहर निकलने वाली नहर के के पास एक लड़की की लाश मिली थी। जो की बुरी तरीके से जली हुई थी। जिसको लेकर आसीवन थाने में अज्ञात लोगों पर हत्या की रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। जिसके बाद लड़की की जब पहचान कराई गई तो गांव के ही योगेंद्र नाम के युवक ने लड़की की पहचान अपनी पत्नी के रूप में की थी। साथ ही उसने पड़ोस में रहने वाले दिव्यांग युवक के ऊपर हत्या का आरोप लगाया था। जिसको देखते हुए पुलिस ने दिव्यांग युवक को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। लेकिन वही लड़की के घर पर पहुंचे एटीएम कार्ड ने पुलिसिया कार्यवाही पर जहां पर्दा हटाया तो वही हत्या के आरोप में सजा काट रहे निर्दोष दिव्यांग युवक को भी जेल की सलाखों से बाहर निकाला है। बताया जा रहा है कि आसीवन थाने के तत्कालीन विवेचक ने 9 जून दो हजार अट्ठारह को आरोपी दिव्यांग युवक को जेल भेज दिया था। वहीं मृतक लड़की के डीएनए की जब जांच पुलिस ने कराई तो डीएनए से पता चला कि जिस लड़की की पहचान योगेंद्र ने अपनी पत्नी के रूप में की थी वह उसकी पत्नी का डीएनए नहीं है। जिसको लेकर पुलिस दोबारा से इस मामले की जांच में जुट गई थी। लेकिन इस हत्या की गुत्थी को एटीएम कार्ड ने चंद मिनटों में ही सुलझा भी दिया।

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जहां एक ओर हत्या के आरोप में दिव्यांग युवक ने 14 माह की जेल काटी तो वहीं दूसरी तरफ एटीएम कार्ड से युवक की बेगुनाही का पता चला और आखिरकार वह जिंदा निकली। पुलिस की मानें तो पुलिस ने बताया कि जिस युवक ने मृतक लड़की को अपनी पत्नी के रूप में पहचान की थी वाह अपने पति से नाराज होकर घर से भाग गई थी। भागने के बाद पत्नी ने महाराष्ट्र के एक नर्सिंग होम में नौकरी कर ली थी। और जब लड़की को बैंक से एटीएम की जरूरत हुई तो उसने एटीएम कार्ड के लिए आवेदन किया और इस आवेदन में उसने उन्नाव के अपने घर के पते का आधार कार्ड लगा दिया। बस फिर क्या था हत्या के आरोप में 14 माह जेल काट चुके दिव्यांग की बेगुनाही का सबूत आखिरकार एटीएम कार्ड बन गया। बताया जा रहा है कि उन्नाव के पते का आधार कार्ड होने की वजह से महाराष्ट्र के बैंक में एटीएम कार्ड मृतक लड़की के घर पर भेज दिया। जिसके बाद लड़की के घरवालों ने फौरन इसकी इत्तिला पुलिस को दी और बताया कि लड़की के नाम से एक एटीएम कार्ड उनके घर पर आया है। जिसको देखते हुए पुलिस फौरन ही हरकत में आई और उसने एटीएम कार्ड की मदद से मृतक लड़की को जिंदा खोज निकाला। पुलिस ने बताया कि मृतक लड़की यानी कि जिंदा हुई लड़की को पुलिस ने कानपुर सेंट्रल से हिरासत में लिया है। जिस लड़की के लिए 14 माह हत्या के आरोप में दिव्यांग ने जेल काटी वह आखिरकार जिंदा निकली। जिससे कि दिव्यांग युवक को बेगुनाह साबित करने में काफी मदद मिली।
एसपी आनंद कुलकर्णी ने पूरी घटना खुलासा करते हुए बताया कि पति की प्रताड़ना से तंग आकर मृतक लड़की यानी की पत्नी अपनी मासूम बच्ची को छोड़कर घर से भाग गई थी और मुंबई जाकर एक नर्सिंग होम में काम करने लगी थी। लेकिन उन्नाव के घर के पते का आधार कार्ड लगाने से 14 माह जेल काट चुके युवक की बेगुनाही का सबूत बना एटीएम कार्ड और जिंदा निकली लड़की। इस पूरे मामले में पुलिस ने बताया कि वह इस बात को लेकर अब कोर्ट को भी अवगत कराएंगे की जिसकी हत्या में दिव्यांग युवक ने 14 माह जेल काटी वह जिंदा है और एटीएम कार्ड ने इस पूरे केस को खोलने में मदद की है। लेकिन फिलहाल पुलिस कुछ भी कहे इस मामले में कहीं ना कहीं 14 माह जेल काट चुके दिव्यांग युवक को जेल भेजने में और बेगुनाह को सजा दिलाने में पुलिस वाले भी दोषी नजर आते हैं देखने वाली बात यह होगी कि कोर्ट पुलिस वालों को कोई सजा देती है या नहीं।

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