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समय पर मिलता अगर इलाज-बच सकती थी-सब इंस्पेक्टर की जान एक्सीडेंट में हुई मौत

  • समय पर मिलता अगर इलाज-बच सकती थी-सब इंस्पेक्टर की जान एक्सीडेंट में हुई मौत

  • प्राइवेट डॉक्टरों की लापरवाही से गई सब इंस्पेक्टर की जान-पीजीआई में हुआ था एक्सीडेंट

लखनऊ पीजीआई थाना क्षेत्र में जहां तेज रफ्तार ने एक सब-इंस्पेक्टर की ज़िंदगी को छीन लिया तो वहीं दूसरी तरफ एक्सीडेंट में घायल हुए सब इंस्पेक्टर को जब हॉस्पिटल ले जाया गया तो बताया गया कि वहां पर इलाज के नाम पर सिर्फ खिलवाड़ हुआ घंटों घायल सब इस्पेक्टर को हॉस्पिटल में रखने के बाद भी काबिल डॉक्टर उनके पैर से बहते हुए खून को रोक ना पाए। जिसके चलते बाद में दूसरे हॉस्पिटल रेफर किया गया जहां पर उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई। बताया जा रहा है कि थाना पीजीआई में तैनात रविंद्र नाथ सब इंस्पेक्टर कल कोर्ट से शाम को जब लौट रहे थे तो वृदावन के पास एक वाहन से उनका एक्सीडेंट हो गया जिसमें उनको काफी चोट आई आनन-फानन में इसकी सूचना जैसे ही पीजीआई इस्पेक्टर को हुई वह फौरन मौके पर पहुंच गए और उनको पास ही में बने हॉस्पिटल में एडमिट करा दिया गया। बताया जा रहा था कि पैर में गंभीर चोट लगने के कारण पैर से खून का बहाव कम नहीं हो रहा था।जिसको देखते हुए पास के हॉस्पिटल में उनको एडमिट कराया गया।

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इंस्पेक्टर
जहां पर लोगों की माने तो उनका इलाज सही ना होने के चलते और डॉक्टरों द्वारा उनके पैर से बहते हुए खून को ना रोक पाने के चलते उनके शरीर में खून की कमी हो गई। जिसके बाद प्राइवेट हॉस्पिटल ने उनको दूसरे हॉस्पिटल रेफर कर दिया जहां पर बताया जा रहा है कि रास्ते मे ही सब इंस्पेक्टर ने दम तोड़ दिया। जैसे ही इसकी सूचना पुलिस महकमे के आला अधिकारियों को हुई फौरन ही पुलिस के अधिकारी पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। वही सब इंस्पेक्टर की मौत से पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई। पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडे ने पुलिस लाइन पहुंचकर खुद मृतक के पार्थिव शरीर को कंधा दिया साथ ही उनके परिवार से मिलकर जहां उनको सात्वना दी। लेकिन बताया गया कि अगर सही समय पर घायल सब इंस्पेक्टर के पैर से बहते हुए खून को डॉक्टर रोक लेते तो शायद उनके जिंदगी बच सकती थी। बरहाल आपको यह जरूर बताते हैं कि राजधानी लखनऊ में सैकड़ों नर्सिंग होम और हॉस्पिटल खुले तो जरूर है लेकिन मरीजों के जान के साथ खिलवाड़ भी खूब हो रहा है। जिसका जीता जागता सबूत यह रहा कि एक्सीडेंट मे घायल सब इंस्पेक्टर का पैर से निकलते हुए खून को रोक पाने में नाकामयाब डॉक्टर उनका इलाज करते रहे जब हाथ से बात निकली तो उन्होंने उनको ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया। अब देखने वाली बात यह होगी कि आखिर पुलिस ऐसे हॉस्पिटल नर्सिंग होम और डॉक्टरों पर भी कोई कार्यवाही करती है या नहीं जो सिर्फ डिग्री तो ले लेते हैं लेकिन इलाज नहीं कर पाते और इसका नतीजा मरीज को जान दे कर चुकाना पड़ता है।

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