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सुप्रीम कोर्ट-कृषि कानून पर रोक, बनी कमेटी- कृषि कानून का समर्थन करने वाले ही कमेटी में

  • कृषि कानून का समर्थन करने वाले ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी में- कैसे मिलेगा न्याय-किसान

  • सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक कृषि कानून पर लगाई रोक कमेटी की गठित

  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी में 4 सदस्य सभी उसे कानून के समर्थन में

दिल्ली-किसान आंदोलन में जहां एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में आज साफ तौर पर कह दिया है कि सरकार इन तीनों कृषि कानूनों पर फिलहाल के लिए रोक लगा दे जब तक उनके द्वारा कोई आदेश नहींं दिया जाता है। तो वहीं दूसरी तरफ इस कृषि कानून की समीक्षा के लिए एक कमेटी का भी सुप्रीम कोर्ट ने गठन किया है। कोर्ट में किसानों के वकील ने कमेटी के गठन को लेकर किसानों की तरफ से ऐतराज़ जताया था। लेकिन कोर्ट ने उन को फटकार लगाते हुए  यह कह दिया  की कमेटी बनानी से  कोई भी दुनिया की ताकत उन को नहीं रोक सकती है।

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कृषि
तो वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई कृषि कानून को लेकर कमेटी में जिन 4 लोगों को रखा गया है। उनको लेकर भी अब सवालिया निशान खड़े होने लगे। समाजवादी पार्टी की वरिष्ठ नेत्री जूही सिंह ने ट्विटर पर एक ट्वीट करते हुए कहां है कि कृषि कानूनों पर गठित नई कमेटी में तो चारों सदस्य  प्रमोद जोशी,अशोक गुलाटी,अनिल घनावत,भूपिंदर सिंह मान पहले से ही नए कृषि कानूनों का समर्थन कर रहे हैं तो किसान जो आन्दोल पर बैठा है उसके विश्वास का संकट और गहरा गया है ,जय हो।

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वहीं दूसरी तरफ जब आज कृषि कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी तो उस समय किसानों के वकील ने कहा कि किसान कमेटी में नहीं जाना चाहते हैं। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा उनको कमेटी बनाने से दुनिया की कोई भी ताकत नहीं रोक सकती है। यह कमेटी सारी बातों को सुनकर उनके सामने सारी स्थिति को स्पष्ट करेगी। लेकिन जिस तरीके से इस कमेटी में कृषि कानून का समर्थन करने वाले लोगों को रखा गया है। तो उसके चलते किसानों में इस कमेटी के प्रति अविश्वास साफ तौर पर देखा जा सकता है।

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किसान कानूनवहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए और नए कृषि कानून के मद्देनजर जो कमेटी बनाई गई है। उसका कोर्ट में ही किसानों के वकील ने किसानों की तरफ से एतराज जताया लेकिन कोर्ट ने उनको जमकर फटकार लगा दी। अब सवाल यह उठ ने लगा है कि कोर्ट द्वारा बनाई गई इस कमेटी में उन्हीं लोगों को शामिल किया गया है जो कृषि कानून का समर्थन कर रहे हैं तो आखिर जो इस कानून का समर्थन कर रहे हैं तो वह क्यों इस कानून को गलत कहेंगे।

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कानून समर्थनयही नहीं कृषि कानून को लेकर बनाई गई इस कमेटी में जिन चार लोगों को रखा गया है। उन चारों ने पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बनाए गए कृषि कानून का समर्थन किया है। अब किसानों के इस कमेटी को लेकर अविश्वास बनना लाजिम है। क्योंकि जो पहले ही इसका समर्थन कर रहा हो तो वह कैसे उस कानून में किसानों द्वारा बताए गए कमियों को दूर कर पाएगा। लेकिन यहां एक और सवाल सामने आता है कि आखिर क्या सुप्रीम कोर्ट को यह नहीं मालूम था कि वह जिन चार लोगों को इस कमेटी में रख रहे हैं वह पहले से ही इस कानून के समर्थक हैं।

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यही नही कृषि कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी के सभी सदस्य तीन किसान क़ानूनों के पक्ष में देश के प्रतिष्ठित अख़बारों में लेख लिख चुके हैं और जिस किसान नेता को शामिल किया है उन्होंने कृषि मंत्री से मुलाक़ात करके क़ानूनों का समर्थन किया था। भूपिंदर सिंह मान और शतकरी संगठन ने पिछले महीने मंत्री एनएस तोमर को एक पत्र भेजा था जिसमें कहा गया था कि वे कानूनों के पक्ष में हैं। दोनों प्रतिनिधि सुप्रीम कोर्ट की बनायीं गई समिति पर हैं।

किसान नेता राकेश टिकैत ने भी ट्वीटर पर ट्वीट करते हुए कहा है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित कमेटी के सभी सदस्य खुली बाजार व्यवस्था या कानून के समर्थक रहे है। अशोक गुलाटी की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने ही इन कानून को लाये जाने की सिफारिश की थी। देश का किसान इस फैसले से निराश है।

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