विशाल आत्महत्या
  • लखनऊ पुलिस के माथे पर विशाल सैनी आत्महत्या कलंक? बिना जांच के आईपीएस को क्लीन चिट

  • बिना जांच आईपीएस को क्लीन चिट-लखनऊ पुलिस के माथे पर विशाल सैनी आत्महत्या कलंक?

लखनऊ-सचिवालय में तैनात विशाल सैनी के खुदकुशी मामले में जहां एक तरफ पुलिस की अधिकारी आईपीएस प्राची सिंह का नाम आ रहा है और मरने से पहले मृतक ने आईपीएस को खुदकुशी के लिए उकसाने और आत्महत्या के लिए मजबूर करने की बात अपने सुसाइड नोट में लिखी है। तो वहीं दूसरी तरफ हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि मृतक द्वारा मिले हुए सुसाइड नोट के बावजूद पुलिस अपने अधिकारी के ऊपर f.i.r. तो छोड़िए कोई भी जांच नहीं कर रही है। जिसको लेकर लगाता विशाल सैनी के परिवार वाले थाना अलीगंज से लेकर थाना हसनगंज मैं f.i.r. लिखाने के लिए चक्कर काट रहे हैं। लेकिन उसके बावजूद भी कहीं पर भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। विशाल सैनी आत्महत्या मामले में पुलिस महकमा लगातार ट्रेनी आईपीएस प्राची सिंह को बचाने के लिए कोई भी कसर नहीं छोड़ रहा है।

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विशाल
आपको बताते चलें कि करीब 1 महीने पहले इंदिरा नगर में एक मसाज पार्लर यानी कि स्पा सेंटर पर पुलिस द्वारा छापेमारी की गई थी और यहां से विशाल सैनी समेत कई अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जिसके बाद विशाल सैनी को जेल भेजा गया था बताया गया है कि 5 मार्च को जब वह जमानत से छूट कर जेल से आया तो उसने बुधवार को हसनगंज थाना स्थित राय दास मंदिर रेलवे क्रॉसिंग के पास ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान दे दी थी। लेकिन मरने से पहले विशाल ने यूपी 112 नंबर पर कॉल कर आत्महत्या करने की बात कही साथ ही ट्रेनी आईपीएस प्राची सिंह पर सेक्स रैकेट में फंसा कर उसकी जिंदगी बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए आत्महत्या कर लिया था। पुलिस ने जब मृतक विशाल की तलाशी ली तो उसके पास से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था। जिसमें उसने अपनी मौत का कारण ट्रेनी आईपीएस प्राची सिंह को ठहराया था।
अलीगंज के रहने वाले विशाल सैनी के पिता अर्जुन सैनी ने बताया कि उनका बेटा इंदिरा नगर में अपने दोस्तों के साथ खड़ा हुआ था तभी वहां पुलिस आ गई और पुलिस ने उसको पकड़ लिया। पुलिस वालों ने परिवार वालों से कुछ देर में विशाल को छोड़ने की बात कही लेकिन उसे फर्जी मामले में पुलिस ने फंसा कर जेल भेज दिया था। वहीं मृतक के पिता ने बताया कि जब से वह जमानत पर घर आया तो बहुत ही तनाव में रहने लगा। यही नहीं उसकी संविदा की नौकरी भी चली गई थी जिससे वह अंदर ही अंदर टूट गया था। साथ ही वह ना तो किसी से बात करता था और ना ही ठीक से खाना खाता था और बाहर भी आना जाना उसने छोड़ दिया था।
विशाल सैनी
इसी के साथ परिवार वालों ने बताया कि बुधवार को विशाल ने सुबह अपने सभी दोस्तों और जानने वालों को व्हाट्सएप पर पहले तो गुड मॉर्निंग का मैसेज भेजा और उसके बाद वह घर से बाहर निकल गया। घर से बाहर निकलने के आधे घंटे बाद ही उसके द्वारा सुसाइड करने की खबर उन लोगों को मिली। जिससे परिवार के लोगों में एकदम से हाहाकार मच गया और पूरे मोहल्ले में मायूसी छा गई। विशाल के पास से मिले हुए सुसाइड नोट में साफ तौर पर उसकी मौत का कारण आईपीएस प्राची सिंह को ठहराया गया है। लेकिन उसके बावजूद भी बिना पुलिस अधिकारियों ने जांच के ही कुछ ही घंटों में ट्रेनी आईपीएस को क्लीन चिट दे दी और इस पूरे मामले में पुलिस के आला अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार भी नहीं हुए।
विशाल सैनी आत्महत्या मे बिना जांच के आईपीएस को क्लीन चिट देना कहीं ना कहीं पुलिस विभाग के माथे पर कलंक साबित हो रहा है। जबकि मरने से पहले विशाल ने अपने सुसाइड नोट में साफ तौर पर यह बात लिखी है कि उसकी मौत का कारण आईपीएस प्राची सिंह हैं। जिन्होंने बिना जांच के उसे जेल भेज दिया लेकिन इसके बावजूद भी पुलिस के आला अधिकारियों ने बिना जांच के ही मृतक द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया और पुलिस अधिकारियों ने सफाई देते हुए कहा कि उनके द्वारा की गई कार्यवाही नियम के अनुसार हैं। यही नहीं पुलिस अधिकारियों ने कहा कि 13 फरवरी को इंदिरा नगर के स्टाइल इन द ब्यूटी सलून एंड स्पा सेंटर से तीन युवकों और पांच युवतियों के साथ विशाल की गिरफ्तारी की गई थी और इन को जेल भेजा गया था। लेकिन इस दौरान विशाल के परिवार वालों ने एक बार भी उसको निर्दोष नहीं बताया और ना ही किसी पुलिस अधिकारी के ऊपर आरोप लगाया। हालांकि विशाल के आत्महत्या करने के बाद और उसके सुसाइड नोट में आईपीएस द्वारा उसको फंसाए जाने मामले को पुलिस अधिकारियों ने जांच तक करने की जरूरत नहीं समझी और फौरन ही इस मामले में आईपीएस को क्लीन चिट दे दी।
आईपीएस
आईपीएस अधिकारी प्राची सिंह पर मुकदमा दर्ज करने को लेकर लगातार विशाल सैनी का परिवार अलीगंज थाने से लेकर हसनगंज थाने तक भटक रहा है। लेकिन पुलिस ने अभी तक इस मामले में कोई भी एफ आई आर दर्ज नहीं की है। परिवार वालों का कहना है कि लगातार पुलिस वाले उनको भगा रहे हैं। परिवार वालों ने बताया है कि पुलिस ने उनकी तहरीर तो ले ली है लेकिन कोई भी उनको रिसीविंग नहीं दी है। अगर थाने में एफ आई आर नहीं दर्ज होती है तो वह लोग कोर्ट का दरवाजा भी खटखटागे। लेकिन जिस तरीके से मृतक के परिवार वाले एक आईपीएस अधिकारी के ऊपर आरोप लगा रहे हैं। तो कानूनन कहीं ना कहीं पुलिस के आला अधिकारियों को एक जांच कमेटी बिठाकर जांच करानी चाहिए। लेकिन पुलिस अधिकारियों ने चंद लम्हों में है आईपीएस को क्लीन चिट दे दी है।
विशाल सैनी आत्महत्या मामला कहीं ना कहीं पुलिस विभाग के ऊपर कलंक साबित होता हुआ नजर आ रहा है। जिसमें एक आईपीएस को बिना जांच के ही क्लीन चिट दे दी जाती है। विशाल के पास से मिले हुए सुसाइड नोट में उसने लिखा कि मैं विशाल सैनी पुत्र अर्जुन सैनी अपने पूरे होशो हवास में आत्महत्या कर रहा हूं और इसका जिम्मेदार प्राची सिंह आईपीएस होंगी। जिन्होंने मेरा पूरा कैरियर ही खत्म कर दिया जिसके चलते मैं समाज में नजर उठा कर नहीं चल पा रहा हूं और मुझे घुटन सी हो रही है। यही नहीं मैं अपने परिवार से नजर भी नहीं मिला पा रहा हूं। इसके आगे सुसाइड नोट पर लिखा था कि आईपीएस प्राची सिंह 2017 बैच की है इन को कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए। जिससे यह आगे किसी निर्दोष को जेल ना भेज पाए और अपने पद का गलत प्रयोग ना कर पाए। प्रमोशन के चक्कर में कई निर्दोषों को सजा ना दे मैं बेकसूर था और मुझे प्राची सिंह ने सेक्स रैकेट में फसाया है। इसके आगे विशाल ने लिखा कि पापा मम्मी आप लोग अपना ख्याल रखना एलआईसी में जो पैसा है उसे अपने मकान बनाने के लिए उपयोग करना आपका लाडला विशाल सैनी।
विशाल
अगर भारतीय संविधान की मानें तो कानून अधिकार देता है कि कोई भी पीड़ित अगर अपनी फरियाद लेेेेकर थाने जाता है तो पुलिस को फौरन ही उसकी तहरीर लेते हुए एफ आई आर दर्ज करनी चाहिए और पूरे मामले की जांच भी करानी चाहिए। लेकिन ज्यादातर मामलों में पुलिस शिकायतकर्ता को टरका देती है। विशाल सैनी मामले में भी पुलिस ने पीड़ित की तहरीर तो ले ली लेकिन उस पर एफ आई आर नहीं दर्ज की है। जबकि नियम यह कहता है कि पीड़ित की तहरीर पर तुरंत एफ आई आर दर्ज करते हुए उस पर जांच होनी चाहिए। विशाल के परिवार द्वारा थाने पर एफ आई आर दर्ज होने के चलते अब परिवार के आगे कोर्ट की शरण लेने के अलावा कोई और चारा नहीं बचा है। बरहाल जिस तरीके से सुसाइड नोट पर आईपीएस प्राची सिंह का नाम लिखा है पुलिस को चाहिए था कि फौरन इस मामले की जांच करवानी चाहिए जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। लेकिन पुलिस अधिकारियों ने बिना जांच के ही आईपीएस अधिकारी को क्लीन चिट दे दी जिसके चलते कहीं ना कहीं पुलिस विभाग पर लोगों के उंगलियां उठती हुई नजर आ रही है।

By shiraj

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